fbpx

जो लोग कोरोनोवायरस के खिलाफ युद्ध जीतते हैं, उन्हें पीटीएसडी का खतरा हो सकता है

fastcomet Web Hosting


चीन के वुहान शहर से शुरू हुई कोरोना वायरस महामारी ने अब तक दुनिया भर में लाखों लोगों को अपना  शिकार बना लिया है। अब यह महामारी लोगों के बीच मनोवैज्ञानिक समस्याएं पैदा कर रही है। यह बीमारी पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) के विकास की भी जिम्मेदार है। चीन के शंघाई के नेवल मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि महामारी के परिणामस्वरूप पीटीएसडी के लक्षण पूरी आबादी में कहीं अधिक गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पीटीएसडी कई देशों में बड़ी आबादी को प्रभावित कर सकता है। www.myupchar.com से जुड़े डॉ. आयुष पांडे का कहना है कि पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर एक ऐसी मानसिक स्थिति है, जिसका सीधा संबंध व्यक्ति के साथ घटी किसी भयानक घटना से होता है। इस घटना को या तो व्यक्ति अनुभव कर चुका होता है या उसे देख चुका होता है। इसके लक्षणों में कोई पुरानी यादें, बुरे सपने और गंभीर चिंताओं के साथ ही घटना से जुड़े अनियंत्रित विचार शामिल हो सकते हैं।

साइकोलॉजिकल मेडिसीन जर्नल में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में जांच की गई कि क्या पीटीएसडी कोरोना वायरस सर्वाइवर (जो लोग बच गए) के बीच देखा गया था? शोध में पाया गया कि क्वॉरेंटीन से बाहर आने से पहले बड़ी संख्या में कोरोना वायरस सर्वाइवर्स पीटीएसडी से पीड़ित थे।

अध्ययन में बताया गया कि सोशल डिस्टेंसिंग, बीमारी का जोखिम, अनिश्चितता, शारीरिक रूप से दिक्कतें, दवा के दुष्प्रभाव, दूसरों को वायरस के ट्रांसमिशन की आशंका और बड़े पैमाने पर मीडिया कवरेज में नकारात्मक खबरों का आना, ऐसे कुछ कारक हैं जो कोरोना वायरस के साथ रोगियों में पीटीएसडी के लक्षणों को पैदा कर सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने यह भी सुझाव दिया कि मरीजों को आइसोलेशन से मुक्त करने के बाद कोरोना वायरस ट्रीटमेंट बंद नहीं होना चाहिए। उन्होंने वायरस से बचकर निकले लोगों के लिए लंबे समय तक मनोवैज्ञानिक इलाज की जरूरत पर जोर दिया। इसलिए, शारीरिक रूप से अलग-थलग होने पर भी सामाजिक रूप से दूसरों से जुड़े रहना महत्वपूर्ण है। महामारी के इस समय में सामाजिक रूप से एकजुट रहने के लिए टेक्स्ट मैसेजिंग, फोन कॉल और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कुछ विकल्प हैं।

पीटीएसडी से पीड़ित लोग अक्सर चिंता के लगातार और तेज लक्षणों से जूझते हैं, जो उन्हें ड्रग्स या अल्कोहल जैसी अस्वास्थ्कारी चीजों पर भरोसा करने के लिए प्रभावित करते हैं। हालांकि, चिंता से निपटने के कई स्वस्थ तरीके हैं। उनमें से एक है रिलैक्सेशन एक्सरसाइज। ऐसी कई तकनीक हैं जो रिलैक्सेशन और स्ट्रेस को कम करने में मदद कर सकती हैं। www.myupchar.com से जुड़े एम्स के डॉ. उमर अफरोज का कहना है कि एक्सरसाइज से शरीर में एंडोर्फिन रिलीज होता है, जिसे अच्छा महसूस कराने वाला हार्मोन भी कहा जाता है। यह मूड को सुधारता है। इसके अलावा गहरी सांस लेने का अभ्यास भी इस डिसऑर्डर से राहत दिलाएगा। यह चिंता और तनाव से निपटने में मदद करेगा। इसके लिए जब सांस लेते हैं, तो पेट फूलना चाहिए और जब सांस छोड़ते हैं, तो पेट नीचे जाना चाहिए। लेकिन लोग इस तरह से सांस लेना भूल जाते हैं और इसके बजाय अपनी छाती और कंधों का उपयोग करते हैं। यह छोटी और उथली सांसों का कारण बनता है, जो बदले में तनाव और चिंता को बढ़ाता है।

इसके अलावा दूसरों से साथ पीटीएसडी के नकारात्मक प्रभावों को दूर करने में काफी मदद कर सकता है। जब चिंता का अनुभव कर रहे हों तो किसी ऐसे व्यक्ति से बात करें जिस पर भरोसा हो। यह प्रक्रिया बहुत मददगार हो सकती है। यह मूड को बेहतर बनाने का एक शानदार तरीका है जो कोरोना वायरस महामारी जैसी तनावपूर्ण स्थितियों को कम करने में मदद करेगा।

अधिक जानकारी के लिए देखें : http://myupchar.com/disease/covid-19/home-based-care-for-patients-recovered-from-covid-19-coronavirus
स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं।

.

Leave a Reply